लेखनी कहानी -09-Feb-2023
चुगली
गीता ने सीता के कान में फुस फुसा कर कहा ’’ जानती हैं, आरती झुठ का ही दम्भ भरती है अमीर होने का, चीनी, चायपत्ती और दुध तो मेरे ही घर से मांग कर ले जाती हैै। ’’
अगले ही दिन सीता ने आरती से कहा ’’ गीता तो अपनी सास की कद्र ही नहीं करती है। ’’
आरती ने गीता के कान में कहा ’’ जानती हैं, सीता ने अपने ससुर को खुब खरी खोटी सुनाई है कल। ’’
अगले दिन तीनों एक साथ मिली, तीनों एक दुसरे को नीची दृष्टि से देख रही थी। सीता ने कहा ’’ चाहे कितनी भी कमी क्यों नहीं हुई, चीनी, चायपत्ती और दुध किसी के घर से मांगने के लिए नहीं गई। ’’
आरती ने कहा ’’ सास तो माँ के बदले माँ होती है, उनका हमेश सम्मान करना चाहिए। ’’
गीता ने कहा ’’ ससुर का अपमान करना अपने पिता का अपमान करना है। ’’
उन तीनों ने अपने-अपने दिमाग पे जोर डाला, तीनों लजा गईं। फिर तीनों ने कभी एक दुसरे की चुगली नहीं की।
समाप्त
पृथ्वी सिंह बेनीवाल
09-Feb-2023 10:55 PM
शानदार
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